Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
तो इसलिठचिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होता है जोड़ों में दरà¥à¤¦, बचाव के लिठकरें ये उपाय
वाशिंगटन, पà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥¤ यह बात तो सà¤à¥€ जानते हैं कि चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर शरीर के जोड़ों में तेज दरà¥à¤¦ होता है, जो बीमारी के ठीक होने के बाद à¤à¥€ लंबे समय तक बना रहता है। à¤à¤• नठअधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने दावा किया कि चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कोशिकाओं को चिनà¥à¤¹à¤¿à¤¤ कर यह पता लगाया जा सकता है कि इलाज के बाद à¤à¥€ कैसे जोड़ों का दरà¥à¤¦ लंबे समय तक बना रहता है। यह अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा पीà¤à¤²à¤“à¤à¤¸ पैथोजन में पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤† है।
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ मानसून के मौसम में होने वाली कà¥à¤› बीमारियों में से à¤à¤• है। यह à¤à¤¡à¥€à¤œ इजिपà¥à¤Ÿà¥€ और à¤à¤¡à¥€à¤¸ à¤à¤²à¥à¤¬à¥‹à¤ªà¤¿à¤•à¥à¤Ÿà¤¸ मचà¥à¤›à¤° के काटने से होता है और वायरस जनित रोग है। चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर अचानक बà¥à¤–ार, ठंड, सिरदरà¥à¤¦, उलà¥à¤Ÿà¥€, जोड़ों में दरà¥à¤¦ और शरीर में चकतà¥à¤¤à¥‡ पड़ जाते हैं। सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और परिवार कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯, à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार की 2017-18 की वारà¥à¤·à¤¿à¤• रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को ठीक करने के लिठन तो कोई वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ है और न ही दवाà¤à¤‚ उपलबà¥à¤§ हैं, लेकिन इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में नजर बनाठरखने की सखà¥à¤¤ जरूरत होती है। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ की लेखक और अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ सà¥à¤•ूल ऑफ मेडिसिन की डेबोरा लेंशॉ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होने वाले जोड़ों के दरà¥à¤¦ के पूरे तंतà¥à¤° को समà¤à¤•र इसके उपचार के उपाय विकसित किठजा सकते हैं।
अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में बताया गया है कि पहली बार चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की पहचान वरà¥à¤· 1950 में तंजानिया में हà¥à¤ˆ थी। अब 40 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देशों में इस रोग के रोगी पाठजाते हैं। इसके वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ लगà¤à¤— 30 से 60 फीसद लोग बीमारी ठीक होने के बाद à¤à¥€ कई सालों तक जोड़ों में दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं।
चूहों पर किया पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—
हालांकि शोधकरà¥à¤¤à¤¾ अब तक यह पता नहीं लगा पाठहैं कि आखिर बीमारी ठीक होने के बाद à¤à¥€ सालों तक मरीज के जोड़ों में दरà¥à¤¦ की शिकायत कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ बनी रहती है। इसका पता लगाने के लिठडेबोरा लेंशॉ और उनकी टीम ने चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के वायरस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कोशिकाओं को चिनà¥à¤¹à¤¿à¤¤ करने के लिठमारà¥à¤•र-रिपोरà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ विकसित की और चूहों पर इसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया।
असंकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कोशिकाओं में आघात करता है वायरस
अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के दौरान लेंशॉ और उनकी टीम ने पाया कि जो कोशिकाà¤à¤‚ वायरस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बच गईं थी, वे मांसपेशियों और तà¥à¤µà¤šà¤¾ की कोशिकाओं के मिशà¥à¤°à¤¿à¤£ से बनी थीं, जो टीकाकरण के 112 दिनों बाद तक à¤à¥€ मौजूद रहती हैं। जब शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने चूहे को वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचने की दवाà¤à¤‚ दी तो इससे चिनà¥à¤¹à¤¿à¤¤ कोशिकाओं (वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कोशिकाà¤à¤‚) की संखà¥à¤¯à¤¾ तो कम हो गई, लेकिन जो कोशिकाà¤à¤‚ वायरल के संकà¥à¤°à¤®à¤£ में आने से बच गई थीं उनमें चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का वायरस अपनी पहà¥à¤‚च बना रहा था।
इलाज के बाद à¤à¥€ शरीर में मौजूद रहता है वायरस
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने कहा कि अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के निषà¥à¤•रà¥à¤· इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इलाज के बाद à¤à¥€ चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का वायरस शरीर में मौजूद रहता है और धीरे-धीरे हमारी कोशिकाओं को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाता है, जिसके कारण जोड़ों में दरà¥à¤¦ की शिकायत बनी रहती है। मारà¥à¤•र-रिपोरà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ उन कोशिकाओं की पहचान करने और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलग करने के लिठà¤à¤• उपयोगी उपकरण साबित हो सकती है जो इस बीमारी के कारण दरà¥à¤¦ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ होती है।
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं...
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में तेज बà¥à¤–ार आता है। बà¥à¤–ार आमतौर पर 102 से 104 फॉरेनहाइट तक चà¥à¤¤à¤¾ है।
तीन से सात दिनों के दौरान जोड़ों में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है। जोड़ों का दरà¥à¤¦ सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ à¤à¤° चल सकता है, लेकिन कà¥à¤› लोगों के मामलों में à¤à¤¸à¤¾ दरà¥à¤¦ à¤à¤• साल या इससे अधिक समय तक à¤à¥€ बना रह सकता है।
आमतौर पर बà¥à¤–ार की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ के बाद दाने दिखते हैं। हथेलियों, तलवों और चेहरे पर à¤à¥€ दाने दिखाई पड़ सकते हैं। मांसपेशियों में à¤à¥€ दरà¥à¤¦ हो सकता है।
ये करायी जाती जांचें हैं
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का पता करने के लिठ‘आर à¤à¤¨ ठपी सी आर’ नामक टेसà¥à¤Ÿ बीमारी के पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में कराया जाता है। बीमारी के दूसरे सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद ‘चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ आई जी à¤à¤® à¤à¤‚टीबॉडी à¤à¤²à¤¾à¤‡à¤œà¤¾â€™ नामक टेसà¥à¤Ÿ से इस बीमारी की डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ में मदद मिलती है।
सजगता बरतें
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की रोकथाम के लिठटीका (वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨) उपलबà¥à¤§ नहीं है। इसलिठमचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से हरसंà¤à¤µ विधि से बचाव करना जरूरी है।
मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव के लिठसोते वकà¥à¤¤ मचà¥à¤›à¤°à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से बचाव के लिठमचà¥à¤›à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ कà¥à¤°à¥€à¤® लगा सकते हैं।
पानी को घर में और आसपास जमा न होने दें।
घरों में बालà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का पानी हर दिन बदलें।
लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इलाज
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ वायरस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कोई विशेष à¤à¤‚टीवायरल इलाज नहीं है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही रोगी का इलाज करते हैं। जैसे पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को तेज दरà¥à¤¦ और बà¥à¤–ार से राहत दिलाने के लिठपैरासीटामोल देते हैं। जोड़ों में होने वाले दरà¥à¤¦ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° कॉरà¥à¤Ÿà¥€à¤•ोसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤¸ नामक दवाà¤à¤‚ देते हैं। परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥ देते रहना चाहिà¤à¥¤
| --------------------------- | --------------------------- |